✍डॉ राकेश कुमार आर्य
चीन के विषय में हम पहले से ही यह मानते आ रहे हैं कि
इस देश की कथनी करनी में बहुत भारी अंतर है । चीन एक ऐसा देश है जो सोया हुआ दानव
है । मानवता नाम की कोई चीज इसकी राजनीति में नहीं मिलती । इसलिए यह किस स्थिति
में कहां तक जा सकता है ? इसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता । मानवता और नैतिकता यह
दोनों चीजें जहां धर्म होता है वहां पाई जाती हैं चीन के कम्युनिस्ट शासक वर्ग का
क्योंकि धर्म की नैतिकता में कोई विश्वास नहीं है , इसलिए
किसी भी प्रकार के नैतिक आचरण की अपेक्षा चीन और चीन के राजनीतिज्ञों से नहीं की
जानी चाहिए । हमने पहले भी ऐसा लिखा था कि चाहे चीन के सैनिक पीछे हट रहे हैं ,
परंतु यह सही ना माना जाए कि वास्तव में ही चीन के सैनिक पीछे हट
रहे हैं । वह कुछ भी कर सकता है और उसी का परिणाम है कि अब चीन ने भारत के साथ
बहुत बड़ी घटना को अंजाम देते हुए हमारे 20 सैनिकों का
बलिदान ले लिया । यद्यपि भारत के वीर सैनिकों ने भी अपनी ओर से जवाबी कड़ी
कार्रवाई करते हुए चीन को यह स्पष्ट संकेत दे दिया कि आज का भारत 1965 का भारत नहीं है और यही कारण है कि हमारे सैनिकों ने चीन के 43 सैनिकों को ढेर कर दिया है । भारत के सैनिकों की वीरता और साहस को सारी
दुनिया ने मुक्त कंठ से सराहा है , जबकि चीन की धृष्टता की
सर्वत्र निंदा हो रही है। इस घटना को विश्व की मीडिया ने बड़ी प्रमुखता से लिया है
। सामान्य रूप से मीडिया ने इस घटना को तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत के रूप में भी
देखा है , इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि भारत चीन के
मध्य बढ़ता टकराव मानवता के लिए कितना विनाशकारी हो सकता है ?
एक्सप्रेस डॉट यूके ने लिखा है कि यह घटना तीसरे विश्व युद्ध की
शुरुआत है , जबकि ‘इजराइल टाइम्स’ ने इस घटना को इन दोनों
परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम करार दिया है। इसी प्रकार
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने इसे विश्व के सबसे घनी और बड़ी आबादी वाले दो देशों के बीच
संघर्ष के रूप में स्थापित किया है। ब्रिटिश अखबार की वेबसाइट ने भारत-चीन टकराव को तीसरे विश्व युद्ध
की शुरुआत कहकर स्थापित किया है ।अखबार की इस टिप्पणी से भारत चीन जैसे परमाणु
शक्ति संपन्न दो देशों के बीच बढ़े संघर्ष की गंभीर परिणति को स्पष्ट रूप में समझा
जा सकता है। चीन जिस प्रकार गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहा है वह मानवता के लिए
कितना विनाशकारी सिद्ध हो सकता है ? इसका सहज ही अनुमान
लगाया जा सकता है। खबर में कहा गया है कि लद्दाख की गलवान घाटी में हुए टकराव में
भारतीय सेना के एक अधिकारी और दो सैनिक शहीद हुए। जबकि खूनी नरसंहार के जवाब में
पांच चीनी सैनिक मारे गए हैं। परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों के बीच टकराव के
परिणामस्वरूप दशकों में यह पहली बार दुर्घटना की सूचना है। हालांकि, चीन ने घायलों की मौत या संख्या की पुष्टि नहीं की है। खबर में
सेवानिवृत्त अमेरिकी सेना के कर्नल लॉरेंस सेलिन के ट्वीट के हवाले से कहा गया है
कि चीन भारत के साथ खिलवाड़ न करे। उन्होंने कहा, दुखद
नुकसान के बावजूद, भारतीय सेना ने चीनी पीपुल्स लिबरेशन
आर्मी के हमलावरों को सजा दी है।
अखबार की इस प्रकार की टिप्पणी से यह भी स्पष्ट होता है कि विश्व
जनमत या विश्व के मीडिया की राय में चीन इस समय ज्यादाती कर रहा है और वह उग्रवाद
के जिस रास्ते पर बढ़ रहा है उससे भारत को मजबूरी में ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं
जिससे मानवता अनचाहे युद्ध की ओर बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। इजरायल के प्रमुख समाचार पत्र ने अपनी वेबसाइट पर खबर में लिखा कि
भारतीय सेना ने कहा कि चीनी सीमा पर तीन सप्ताह में बढ़े तनाव के बाद मंगलवार को
आपसी संघर्ष में तीन भारतीय सैनिक शहीद हो गए हैं। खबर में कहा गया कि भारतीय सेना
ने कहा कि दोनों तरफ से हताहत हुए, लेकिन चीन ने किसी भी मौत
या घायल होने का कोई उल्लेख नहीं किया बल्कि इस घटना के लिए भारत पर तेजी से
दोषारोपण किया। 3,500 किलोमीटर के सीमांत पर दो
परमाणु-सशस्त्र दिग्गजों के बीच काफी नियमित आधार पर विवाद रहे हैं, जिनका कभी ठीक से सीमांकन नहीं किया गया, लेकिन
दशकों में कोई भी मारा नहीं गया था।
इस अखबार ने भी सधी हुई भाषा में यह स्पष्ट कर दिया
है कि चीन और भारत के बीच सीमा विवाद इस समय बहुत नाजुक मोड़ पर पहुंच चुका है और
यदि दोनों देशों ने स्थिति को नहीं संभाला तो बहुत विस्फोटक स्थिति बन सकती है। अमेरिका के सबसे बड़े अखबार ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि सीमा पर
चीन से घातक संघर्ष में चीनी सैनिकों के द्वारा पथराव में भारत के तीन सैनिक मारे
गए हैं। हिमालय क्षेत्र में विवादित सीमा पर हुई इस झड़प से दुनिया की सर्वाधिक
आबादी वाले दो देशों में तनाव और बढ़ गया है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार पथराव
में दोनों देशों के जवान हताहत हुए हैं। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप
लगाया कि भारतीय सेना ने सोमवार को दो बार सीमा पार की और चीनी कर्मियों पर हमला
किया। जबकि भारतीय सैन्य अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि चीनी सैनिकों द्वारा
ऊंचाई से चट्टानें गिराने से सैनिक मारे गए हैं। वहीं, विदेश
नीति के विश्लेषकों का कहना है कि चीन अधिक दबंग होकर अपने क्षेत्र का विस्तार कर
रहा है। चाहे दक्षिण चीन सागर हो या हिमालय क्षेत्र। वियतनाम, ताइवान, हांगकांग और मलेशिया तेल रिंग मामले इसके
ताजा उदाहरण हैं।
अमेरिकी विश्लेषकों ने चीन की दबंगई को स्पष्ट करते हुए विश्व जनमत
को यह संदेश किया है कि चीन का साम्राज्यवाद तीसरे विश्व युद्ध का कारण बन सकता है
। यदि चीन ने अपने आप को नहीं संभाला तो न केवल तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत करने
का श्रेय उसको जाएगा बल्कि इस युद्ध के अंतिम परिणाम के रूप में उसका पतन भी
निश्चित है । यद्यपि विशाल बारूद के ढेर पर बैठी हुई मानवता के लिए यह युद्ध
अस्तित्व का प्रश्न बन कर आएगा। क्योंकि कई देश इस समय ऐसे हैं जो दर्जनों बार इस
जैसी दुनिया को समाप्त कर सकते हैं । तब किसका पतन और किस का उत्थान होगा ?
– यह कहा नहीं जा सकता है । निश्चित रूप से मानवता का विनाश ही
होगा। ऐसे में यूएन जैसी संस्था को हस्तक्षेप कर मानवता की रक्षा के लिए दो परमाणु
शक्ति संपन्न देशों के मध्य बढ़ते टकराव को रुकवाने की दिशा में ठोस कार्य करना
चाहिए और चीन को किसी भी संप्रभु राष्ट्र की संप्रभुता को छतिग्रस्त न करने देने
के लिए कठोर निर्देश देने चाहिए । विश्व स्तर पर संसार के सभी नेताओं को व
कूटनीतिक प्रयासों से मानवता की युद्धों से रक्षा करने वाले लोगों को सक्रिय होना
चाहिए।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन की वेबसाइट पर खबर में कहा गया कि
विवादित कश्मीर क्षेत्र के लद्दाख में चीनी बलों के साथ झड़प में तीन भारतीय सैनिक
मारे गए हैं। खबर में कहा गया कि दोनों परमाणु शक्तियों के बीच हाल के हफ्तों में
सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच यह टकराव सामने आया है। हालांकि, दोनों
तरफ से गोलियां नहीं चलीं हैं। मीडिया रिपोर्ट में पीट-पीटकर मारे जाने की बात
सामने आई है, लेकिन सेना ने पुष्टि नहीं की। इसका परिणाम जो
भी हो, लेकिन नवीनतम घटना से भारत में चीन विरोधी भावनाओं की
एक नई लहर शुरू होने की संभावना है ।
खाड़ी देशों के प्रमुख मीडिया संस्थान ‘अलजजीरा’ की वेबसाइट पर खबर
में कहा गया है कि भारत और चीन के बीच लद्दाख के हिमालयी क्षेत्र में हिंसक टकराव
हुआ है। भारतीय सेना के प्रवक्ता के हवाले से एक अधिकारी सहित तीन जवान मारे जाने
का जिक्र है। वहीं, चीन के ग्लोबल टाइम्स अखबार के प्रधान
संपादक के हवाले से कहा है कि चीनी सेना को भी झड़प में हताहत होना पड़ा है। दोनों
परमाणु हथियारों से लैस पड़ोसियों ने सीमा पर बख्तरबंद टैंक और तोपों सहित हजारों
सैनिक, लद्दाख क्षेत्र में मई से तैनात कर रखे हैं। रिपोर्ट
में कहा गया कि भारतीय अधिकारियों का कहना है कि चीनी सैनिकों ने तीन अलग-अलग
बिंदुओं पर सीमा पार की और मौखिक चेतावनी की अनदेखी की। जबकि चीन ने भारत पर
विवादित सीमा पार करने का आरोप लगाया है।
इस समय दुनिया बहुत ही अधिक गैर जिम्मेदार लोगों की दया पर टिकी हुई
है। राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैर जिम्मेदार नेतृत्व वही होता है जो
निहित स्वार्थों में सोचता है या किसी वर्ग विशेष को क्षति पहुंचाने के दृष्टिकोण
से अपने कार्यों को पूर्ण करता है या जब किसी देश का नेतृत्व अपने राष्ट्रीय हितों
के दृष्टिगत मानवता के हितों की अनदेखी करता है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य पर यदि
दृष्टिपात किया जाए तो हर नेता और हर देश का नेतृत्व इस समय निहित स्वार्थों की
बात कर रहा है। कलह , कटुता , क्लेश और
एक दूसरे को नीचा दिखाने की घृणास्पद बातें इतनी अधिक बढ़ गई हैं कि लगता है विश्व
की नाभि टहल गई है । यज्ञ को इस सृष्टि की नाभि कहा गया है यज्ञ ट्रस्ट इतना भी
इसलिए है कि इसमें एक व्यक्ति दूसरे के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करता है
अधिकारों की लूट नहीं मचाता जब यह भावना वैश्विक स्तर पर व्याप्त हो जाती है तो
विश्व का विनाश निश्चित हो जाता है यदि यह भावना इस समय विश्व का एक संस्कार बन
चुकी है तो निश्चय ही हम वैश्विक विनाश के बहुत निकट खड़े हैं।
सचमुच विश्व ने भारत के संस्कारों को छोड़कर बहुत भारी गलती की है
यदि भारत के संस्कारों को विश्व अपनाए रखता तो आज विश्व में अधिकारों की लूट न
मचकर कर्तव्यों को पूर्ण कर एक दूसरे का सहायक बनने का भाव विश्व का स्थायी
संस्कार होता । जिससे सर्वत्र शांति ही शांति होती । यदि अभी भी वैश्विक नेतृत्व
भारत के संस्कार को अपनाने की दिशा में ठोस कार्य करे तो मानवता को आसन्न संकट से
बचाया जा सकता है ।
✍डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत



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